भट्टा मित्रा डायरीज़ — 2026-2027 — कोयले का खेल
कोयला महँगा नहीं हुआ। भाड़ा महँगा हुआ है। मैं 13 साल से अपना भट्ठा चला रहा हूँ। 2018 में कोयले के रेटों से तंग आकर — और क्वालिटी की कोई गारंटी न होने से — मैं अपना कोयला सप्लायर खुद बन गया। यानी दोनों तरफ से देखा है। हर भट्ठा मालिक ये जानता है, फिर भी साफ कहना जरूरी है। ईंट बनाने में सबसे बड़ा खर्च कोयले का है। जमीन, मजदूरी, मिट्टी, ढुलाई — कोई भी खर्च उतना असर नहीं डालता जितना कोयला डालता है। कोयले के रेट में जो फर्क आता है, वो सीधा प्रति हज़ार ईंट की लागत में चढ़ जाता है, और उसे छिपाने की कोई जगह नहीं होती। इसीलिए दबाव डालने के लिए सबसे आसान जगह यही है। आजकल आयातित कोयला बहुत ऊँचा कोट हो रहा है। लेकिन अमेरिका में खदान पर भाव कई हफ्तों से स्थिर है। बढ़ा है समुद्री भाड़ा — ईरान युद्ध के चलते फरवरी से जुलाई तक करीब 36%, तीन साल का सबसे ऊँचा स्तर। ये कोयले का दाम नहीं, उसे यहाँ लाने का खर्च है। इसी वजह से भारत आने वाली खेपें भी कम हुईं। पिछला सीज़न याद कीजिए। यही बात चली थी — अमेरिकी कोयला खत्म हो रहा है, अभी बुक करा लो। लोगों ने ऊँचे रेट पर बुक कराया और कई को कोयला मिला ह...